Wednesday, October 28, 2009

ग़ज़ल

जिंदगी हमने कहा कहते हैं मेरा नाम है
मेरे सुखन के नाम पे अच्छा भला इल्ज़ाम है

अच्छे बुरे लेकिन सभी गिरते हैं तेरी बज़्म में
गिरते हुओं को थामले ऐसा भी कोई जाम है

दिखते कहीं हैं खार तो कर दे वो मेरी राह में
खुशियाँ तेरे दामन में हैं ग़म से तुझे क्या काम है

गैर को दी हर खुशी लेकिन हमें बस ज़ख्मेदिल
चारों तरफ़ ये गुफ्तगू हर सुबह हर शाम है

तरकीब हमने की बहुत पर बात आगे न बढ़ी
तेरा इश्क भी रुसवा हुआ मेरी चाह भी बदनाम है

महफिले दुनिया में बस एक आप ही तो खास थे
वरना जहाँ का हर नज़ारा बेवजह है आम है

ग़म दे मुझे या दे खुशी दिल दे रहा फिर भी दुआ
तेरे सभी सितम लगे 'पुरनम' को बस कलम है

प्रभा पांडे 'पुरनम'

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