Monday, February 21, 2011

रंजो ग़म ही नहीं दुश्मनी से मिले

रंजो ग़म ही नहीं दुश्मनी से मिले
ज़ख्म दिल भी हमें दोस्ती से मिले

अब ज़माने से हम क्या शिकायत करें
जो थे अपने वही दुश्मनी से मिले

नाज़ करते रहे जिन पे हम आज तक
जब वो हम से मिले बे - रूखी से मिले

दुश्मनों ने सदा प्यार की बात की
तल्ख़ लहजे हमें दोस्ती से मिले

एक ग़म हो तो "सागर" गिला हम करें
सैकड़ों ग़म हमें मुफलिसी से मिले

सागर कादरी "झांसवी"
Mob.9889405047


तल्ख़ - कड़वे
गिला - शिकवा
मुफलिसी - ग़रीबी

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