Tuesday, February 22, 2011

जब वो नज़रों से पिलाते हैं ग़ज़ल होती है

जब वो नज़रों से पिलाते हैं ग़ज़ल होती है
दिल को मदहोश बनाते हैं गज़र होती है

देख मेरी तरफ प्यार भरी नज़रों से
शर्म से जब वो लजाते हैं ग़ज़ल होती है

शमा जलती है सरे शाम पतिंगे उस दम
जान जब अपनी लुटाते हैं ग़ज़ल होती है

कश्तियाँ खेते हुए जब भी मछेरे 'सागर'
कोई जब गीत सुनाते हैं ग़ज़ल होती है


सागर कादरी "झांसवी"
Mob.9889405047

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