Saturday, January 1, 2011

सोलह सावन जिस जोवन को तूने पाला पोसा है

सोलह सावन जिस जोवन को तूने पाला पोसा है
इस जोवन के क़दमों को मेरे प्यार का बोसा है

इस जोवन के लिए शहंशाह मरते मिटते आये हैं
जो बैरागी थे दुनियां से, वो भी कहाँ बच पाये हैं
मैं भी फ़िदा हूँ इस जोवन पे, ये जोवन ही ऐसा है

सोलह सावन जिस जोवन को तूने पाला पोसा है

तेरे रूप की छाँव मिले फिर दुनियां की परवाह किसे
दोनों जहाँ की खुशियाँ मिले और सारी ख़ुदाई मिले उसे
ऐसे में परवाह किसे फिर मौसम चाहे जैसा है

सोलह सावन जिस जोवन को तूने पाला पोसा है
इस जोवन के क़दमों को मेरे प्यार का बोसा है

मज़हर अली

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