Saturday, March 5, 2011

जाते जाते मुझे कुछ दुआ दीजिये

जाते जाते मुझे कुछ दुआ दीजिये
आखरी वक़्त है मुस्कुरा दीजिये

वो न आये सितारे भी रुख्सत हुए
झिलमिलाती शमा को बुझा दीजिये

मुस्कुराएगा आखों में काजल अभी
अपनी पलकों को जुम्बिश ज़रा दीजिये

मिट चुका हूँ मैं जब आपके इश्क़ में
बेवफाई की फिर क्यों सज़ा दीजिये

बुझ न पायेगी 'सागर से अब तशनगी
अपनी नज़रों से मुझको पिला दीजिये


सागर कादरी "झांसवी"
Mob.9889405047

वक़्त - समय
रुख्सत - विदा
शमा - दीपक
जुम्बिश - हरकत
इश्क़ - प्रेम
तशनगी - प्यास


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