Thursday, December 24, 2009

ग़ज़ल

जब से गया है छोड़के ये दिल उदास है

ऐसा भी लग रहा है के तू आस पास है

तुझ से बिछड़ से आज भी तन्हा नहीं हूँ मैं

खुशबु तेरे बदन की अभी मेरे पास है

तुम क्या गये के रूठ गयी हम से हर ख़ुशी

पैमाने ख़ाली हाँथ में ख़ाली गिलास है

आँखें खुली रहीं मेरी मरने के बाद भी

आँखों को मेरी आपके आने की आस है

आजा तू मेरे प्यार की चादर को ओढ़ कर

दीवाना तेरा तेरे लिए बदहवास है

जिसने भी तुझ को देखा वो तेरा ही हो गया

न जाने तेरे हुस्न में क्या खास बात है

मायूसियाँ 'नियाज़' के चेहरे की देखकर

ये गुल उदास चाँद सितारे उदास है

मोहम्मद नियाज़ महोब्वी

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