Tuesday, December 29, 2009

सुख ही सुख और जिंदगानी में

सुख ही सुख और जिंदगानी में
जैसे कोई लकीर पानी में

सच ही बोलेगा जिंदगी में तू
अहद यह कर ले शादमानी में

जिनसे फूलों की थी उम्मीद हमें
उनसे पत्थर मिले निशानी में

तुम से आगाज़ था कहानी का
तुम ही अंजाम हो कहानी में

मेरा ही क्या बहक ही जाता है
अच्छे अच्छों का दिल जवानी है

प्यार करने से तो नहीं होता
प्यार होता है नागहानी में

नाम रुकना है मौत का यारो
जिंदगी तो है बस रवानी में

'सोज़' ख़ामोश रह के आया है
लुत्फ़ जीने का बेज़बानी में

प्रोफेसर राम प्रकाश गोयल 'सोज़'
mob. 09412287787

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