Saturday, April 11, 2015

हुस्न की मैं वो हसीं तस्वीर हूँ

 हुस्न की मैं वो हसीं तस्वीर हूँ 
तितलियों के जिस्म पर तहरीर हूँ 

मेरे चेहरे से अयां हर बात है 
देखिये में वक़्त की तस्वीर हूँ 

हाथ अपना दूर ही रखिये हुज़ूर 
मैं किसी के पाँव की ज़ंज़ीर हूँ 

दोस्तों के वास्ते हूँ मिस्ले गुल 
दुश्मनों के वास्ते शमशीर हूँ 

मुझ से मंज़िल का पता मत पूछिये 
मैं तो ख़ुद भटका हुआ रहगीर हूँ 

जिसको देखा था कभी 'इक़बाल' ने 
मैं उसी ही ख़्वाब की ताबीर हूँ 

इक़बाल बन्ने 'झांसवी' 



No comments:

Post a Comment