Friday, April 3, 2015

हुस्न की में वो हंसीं तस्वीर हूँ

हुस्न की मैं  वो हंसीं तस्वीर हूँ
तितलियों के जिस्म पर तहरीर हूँ

मेरे चेहरे से अयां हर बात है
देखिये में वक़्त की तस्वीर हूँ

हाथ अपना दूर ही रखिये हुज़ूर
में किसी के पांव की ज़ंज़ीर हूँ

दोस्तों  के वास्ते मिस्ले गुल
दुश्मनों के वास्ते शमशीर हूँ

मुझ से मंज़िल का पता मत पूछिये
में तो खुद भटका हुआ रहगीर हूँ

जिसको देखा था कभी 'इक़बाल' ने
में उसी ही ख़्वाब की ताबीर हूँ

इक़बाल बन्ने झांसवी


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