Friday, February 6, 2009

हम तबाही के ये हालत बताएं किसको

हम तबाही के ये हालत बताएं किसको
ज़ख्म दिल गहरे हैं इतने के दिखाएं किसको

क्या करें आग भड़कती तो है दिल में सब के
जिंदगी ख़ुद ही चिता है तो जलाएं किसको

ओस की बूंदों से भीगे हैं सभी के दामन
अपने हम दर्द का अहसास दिलाएं किसको

हम न छीनेंगे किसी और के होंटों की हसी
मुस्कुराने की तमन्ना में रुलाएं किसको

कौन अब देगा सहारा तेरी रहमत के सिवा
तू हमारा है तो आवाज़ लगाएं किसको

कौन बिगड़ी हुई तकदीर का साथी है 'नयाज़'
इस ज़माने में भला अपना बनाएं किसको

नयाज़ महोब्वी

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