Sunday, April 12, 2009

गर कुछ पेड़ लगाए होते

गर कुछ पेड़ लगाए होते
घनी धूप में साये होते

पानी बदल दिया होता तो
कमल न ये मुरझाए होते

वे भी ख़फा नहीं रह पाते
दिल से यदि मुस्काए होते

अंत समय में न पछताते
यदि कुछ पुण्य कमाए होते

'पारस' यदि समझौता करते
सारे जग में छाए होते

डॉ रमेश कटारिया 'पारस'

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